उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में 9 विधानसभा और 1 विधान परिषद सीट पर आगामी 6 महीने के भीतर उपचुनाव होगा

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लखनऊ

देश में नरेंद्र मोदी की सरकार तीसरी बार बन चुकी है. 10 जून की पहली कैबिनेट बैठक के साथ ही कामकाज भी शुरू हो चुका है. नए मंत्री अपना प्रभार ग्रहण कर रहे हैं. पुराने मंत्री अपना पुराना कामकाज ही आगे बढ़ा रहे हैं. इस बीच उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा और 1 विधान परिषद सीट पर अब सबकी नजरें टिकी हैं. कारण, इन सीटों से विधायक अब सांसद बन चुके हैं और एक-एक करके विधायकी से इस्तीफा देने जा रहे हैं. इसके बाद प्रदेश की 9 विधानसभा और 1 विधान परिषद सीट पर आगामी 6 महीने के भीतर उपचुनाव होगा. 

दरअसल, प्रदेश की इन 9 विधानसभा सीटों पर 4 पर सपा, 3 पर बीजेपी और 1-1 पर आरएलडी-निषाद पार्टी के विधायक हैं. वहीं योगी सरकार में पीडब्लूडी मिनिस्टर जितिन प्रसाद विधान परिषद सदस्य हैं, जिन्हें बीजेपी ने इस बार पीलीभीत सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाया.
उन्होंने सपा प्रत्याशी भगवत सरन गंगवार को 164935 वोटों से हरा दिया. जितिन प्रसाद को पूर्व सांसद वरूण गांधी की जगह टिकट दिया गया था. जितिन प्रसाद ने विधान परिषद से इस्तीफा दे दिया है. उन्हें मोदी सरकार 3.0 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय में राज्य मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाया गया है. 

यूपी के ये विधायक देंगे इस्तीफा

1.सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव (मैनपुर की करहल विधानसभा सीट से विधायक)

सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव प्रदेश की मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से विधायक हैं. इस बार उन्होंने कन्नौज से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता है. अब अखिलेश केंद्र की राजनीति में नजर आएंगे, इसके चलते वह विधायकी छोड़ रहे हैं. इसी के साथ अब संसद में पति-पत्नी यानी अखिलेश-डिंपल की जोड़ी नजर आएगी. डिंपल यादव मैनपुरी से चुनाव जीती हैं.

2. सपा के अवधेश प्रसाद (फैजाबाद की मिल्कीपुर विधानसभा सीट)

फैजाबाद की मिल्कीपुर विधानसभा सीट से सपा के दिग्गज विधायक अवधेश प्रसाद को पार्टी ने इस बार लोकसभा चुनाव में उतारा. उन्होंने फैजाबाद सीट से बीजेपी के दो बार के सांसद लल्लू सिंह को करारी शिकस्त दी. फैजाबाद वही लोकसभा सीट है, जिसके अंतर्गत अय़ोध्या विधानसभा भी आती है. ऐसे में इस सीट पर सपा की जीत के कई मायने हैं. 9 बार के विधायक अवधेश प्रसाद अब सांसद पहुंचने पर विधायकी से इस्तीफा देंगे. यानी मिल्कीपुर विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होगा.

3. सपा के लालजी वर्मा (अम्बेडकर नगर की कटेहरी विधानसभा सीट)

अम्बेडकर नगर की कटहेरी विधानसभा सीट से विधायक लालजी वर्मा ने इस बार के लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है. उन्होंने अम्बेडकर नगर लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर 137247 वोटों से जीत हासिल की है. यहां उन्हें 544959 वोट मिले हैं. वहीं भाजपा से रितेश पांडेय को 407712 वोट मिले. यहां बहुजन समाज पार्टी के कमर हयात को 199499 वोट हासिल हो सके हैं. अम्बेडकर नगर लोकसभा सीट कभी बसपा प्रमुख मायावती का गढ़ माना जाता था. मायावती यहां से सांसद भी रह चुकी हैं. इस बार यहां सपा और भाजपा के बीच टक्कर रही.

4. सपा के जिया उर रहमान बर्क (मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट)

मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट से विधायक जियाउर रहमान बर्क को सपा ने इस बार  संभल सीट से लोकसभा चुनाव लड़ाया. उन्होंने यहां से 121494 वोटों से जीत दर्ज की. पूर्व सांसद शफीकुर रहमान बर्क के पोते जिया उर रहमान पहली बार सांसदी का चुनाव लड़े और जीते हैं. संभल लोकसभा सीट को सपा का गढ़ माना जाता है. 2019 में यहां से शफीकुर रहमान बर्क ने जीत दर्ज की थी. सपा ने शफीकुर रहमान को ही इस बार भी टिकट दिया था, लेकिन चुनाव घोषणा के कुछ दिनों बाद ही उनका निधन हो गया, जिसके बाद पार्टी ने उनके पोते और कुंदरकी विधायक जिया उर रहमान को टिकट दिया. सांसद बनने के बाद अब वह विधायकी से इस्तीफा देंगे.

5. बीजेपी के अनूप वाल्मीकि प्रधान (अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट)

अलीगढ़ की खैर विधानसभा सीट से विधायक अनूप वाल्मीकी प्रधान को बीजेपी ने इस बार हाथरस लोकसभा सीट से मैदान में उतारा था. उन्होंने यहां से करीब डेढ़ लाख वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. अनूप वाल्मीकी को इस चुनाव में कुल 5 लाख 54 हजार 746 वोट मिले, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सपा के जसवीर वाल्मिकी को महज 3 लाख 7 हजार 428 वोट मिले. अनूप प्रधान वर्तमान में योगी सरकार में राज्य मंत्री भी हैं. गांव के पंचायत से अपनी राजनीति शुरू करने वाले अनूप प्रधान बनने के बाद विधायक चुने गए थे. अब सांसद बनने के बाद वह विधायकी से इस्तीफा देंगे.

6. बीजेपी के अतुल गर्ग (गाजियाबाद विधानसभा सीट)

गाजियाबाद सदर विधानसभा सीट से 2017 और फिर 2022 में विधायक बने अतुल गर्ग को बीजेपी ने इस बार लोकसभा चुनाव में उतारा था. उन्होंने गाजियाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते हुए INDIA गठबंधन की कांग्रेस प्रत्याशी डॉली शर्मा को 3 लाख से अधिक वोटों से हराया है. वह पिछली योगी पिछली सरकार में हेल्थ मिनिस्टर थे. अतुल गर्ग गाजियाबाद नगर निगम के पहले मेयर दिनेश चंद्र गर्ग के बेटे हैं. बीजेपी ने उन्हें इस बार गाजियाबाद के निवर्तमान सांसद वीके सिंह का टिकट काट कर उम्मीदवार बनाया था. सांसद बनने के बाद अब गर्ग विधायकी से इस्तीफा देंगे.

7. बीजेपी के प्रवीण पटेल (फूलपुर विधानसभा सीट)

प्रयागराज जिले की फूलपुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक प्रवीण पटेल इस बार लोकसभा चुनाव लड़े और जीते. फूलपुर लोकसभा सीट से प्रवीण पटेल ने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अमर नाथ सिंह मौर्य को कड़े मुकाबले के बाद महज 4,332 वोटों से हराया. बीजेपी ने यहां से अपने मौजूदा सांसद केसरी देवी पटेल का टिकट काटकर प्रवीण पटेल को उम्मीदवार बनाया था. प्रवीण पटेल कांग्रेस के पूर्व विधायक महेंद्र प्रताप पटेल के बेटे हैं. महेंद्र प्रताप पटेल झूंसी विधानसभा क्षेत्र से 1984, 1989 और 1991 में विधायक चुने गए थे. प्रवीण पटेल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बसपा से की थी. उन्होंने 2007 में बसपा के टिकट पर फूलपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीता था, हालांकि 2012 में चुनाव हार गए थे. अब सांसद बनने के बाद पटेल विधायकी से इस्तीफा देंगे.

8. आरएलडी के चंदन चौहान (मीरापुर विधानसभा सीट)

मीरापुर विधानसभा सीट से विधायक चंदन चौहान ने इस बार आरएलडी के टिकट पर बिजनौर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. इस सीट पर बीजेपी-आरएलडी गठबंधन में चुनाव लड़ा गया. यूपी के पूर्व उपमुख्यमंत्री नारायण सिंह के पोते चंदन चौहान ने इस लोकसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले में 37 हजार 508 सीटों से सपा उम्मीदवार को हराया. चंदन चौहान के पिता संजय चौहान भी बिजनौर सीट से सांसद और विधायक रह चुके हैं. अब सांसद बनने के बाद चंदन चौहान विधायके से इस्तीफा देंगे.

9.निषाद पार्टी के विनोद कुमार बिंद (मिर्जापुर जिले की मझवा विधानसभा सीट)

मिर्जापुर की मझवा विधानसभा सीट से विधायक विनोद कुमार बिंद ने बीजेपी के टिकट पर भदोही लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा. उन्होंने यहां टीएमसी के प्रत्याशी ललितेशपति त्रिपाठी को हराया है. ललितेश सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार थे. सपा ने INDIA गठबंधन तहत ये सीट टीएमसी को दी थी. भदोही लोकसभा सीट से बीजेपी के विनोद कुमार बिंद ने 44746 मतों से जीत दर्ज की. उन्‍हें 458877 मत मिले हैं, जबकि निकटतम प्रतिद्वंदी ललितेशपति त्रिपाठी को 414131 मत मिल हैं. अब सांसद बनने के बाद वह विधायकी से इस्तीफा देंगे. इसके बाद मिर्जापुर की मझवा विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होगा.

14 दिन के भीतर देना होता है इस्तीफा

बता दें कि नियमानुसार नेता का किसी दूसरे सदन का सदस्य निर्वाचित होने के बाद 14 दिन के भीतर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना अनिवार्य है. वहीं इस्तीफा देने के बाद खाली हुई विधानसभा सीट पर 6 महीने के भीतर उपचुनाव कराना भी अनिवार्य है. ऐसे में उक्त विधायक जो सांसद निर्वाचित हुए हैं, वह आगामी 1-2 दिनों में इस्तीफा देंगे. वहीं इसके बाद चुनाव आयोग द्वारा इन विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव की तैयारी शुरू कर दी जाएगी और तारीखों का ऐलान कर दिया जाएगा.

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