वॉशिंगटन
अमेरिका और भारत के बीच संबंधों में खटास आ गई है। टैरिफ तो एक वजह है ही साथ ही, दूसरी वजह ट्रंप का बार-बार भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाने का दावा करना भी माना जा रहा। 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन कॉल हुई थी, जिसमें ट्रंप चाहते थे कि मोदी उन्हें नोबेल पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करें। इस पर पीएम मोदी भड़क गए थे। दोनों नेताओं के बीच 35 मिनट तक फोन पर बात हुई थी।
अमेरिकी अखबार ने खुलासा किया है कि 17 जून को ट्रंप ने मोदी से फोन कॉल पर फिर भारत-पाकिस्तान सीजफायर का मुद्दा उठाया और कहा कि उन्हें सैन्य तनाव खत्म करवाने पर कितना गर्व है। उन्होंने पीएम मोदी से कहा कि पाकिस्तान उन्हें (ट्रंप) नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करने वाला है। इसका मतलब यह था कि पीएम मोदी भी ट्रंप को नॉमिनेट करें। भारतीय नेता (पीएम मोदी) भड़क गए और दो टूक कहा कि भारत-पाक सीजफायर में ट्रंप का कोई लेना-देना नहीं है। यह भारत-पाक के बीच ही तय हुआ था।
पीएम मोदी की टिप्पणियों को ट्रंप ने नजरअंदाज कर दिया, लेकिन सीजफायर पर असहमति और मोदी द्वारा नोबेल पुरस्कार पर बात करने से इनकार करने की वजह से दोनों नेताओं के बीच संबंध में खटास आ गई। जून में हुई इस फोन कॉल के कुछ समय बाद ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का फैसला किया। उन्होंने हवाला दिया कि भारत रूस से लगातार तेल आयात कर रहा है, जिसकी वजह से अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा। भारत पर अमेरिका द्वारा कुल 50 फीसदी टैरिफ वसूला जा रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप से परिचित लोगों के अनुसार, अब ट्रंप के शरद ऋतु में भारत आने की कोई योजना नहीं है, जबकि पहले उन्होंने पीएम मोदी को बताया था कि वे इस साल के आखिरी में क्वाड शिखर सम्मेलन में भारत आएंगे। 17 जून को हुई बातचीत के बाद से अब तक दोनों नेताओं में कोई भी वार्ता नहीं हुई है, जिससे दोनों के बीच खराब होते संबंधों का पता चलता है।
एनवाईटी ने अमेरिका और भारत में एक दर्जन से भी अधिक लोगों के साथ बातचीत के आधार पर रिपोर्ट तैयार की है। ज्यादातर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त रखी थी। उल्लेखनीय है कि ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान पीएम मोदी और उनके बीच काफी अच्छे रिश्ते थे। पीएम मोदी के अमेरिका में भव्य कार्यक्रम हुए थे, जबकि ट्रंप जब 2020 में भारत आए तब गुजरात में नमस्ते ट्रंप आयोजित किया गया था, लेकिन दूसरे कार्यकाल में अब दोनों नेताओं के बीच रिश्ते खराब हो गए हैं।
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