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अमेरिकी बाजार में फिर 4 अप्रैल 2025 को देर रात फिर बड़ी गिरावट आई

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वाशिंगटन

अमेरिकी बाजार में शुक्रवार, 4 अप्रैल 2025 को देर रात फिर बड़ी गिरावट आई है. नैस्‍डैक, Dow Jones और S&P 500 इंडेक्‍स 5 फीसदी से ज्‍यादा गिर गए. वॉल स्ट्रीट कोविड-19 संकट के चरम के बाद से सबसे तीव्र गिरावट का सामना कर रहा है. इस गिरावट को लेकर एक ही बड़ा कारण माना जा रहा है, जो राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप का टैरिफ (Donald Trump Tariff) है.

चीन ने भी अमेरिका के टैरिफ पर रिएक्‍शन देते हुए 10 अप्रैल से अमेरिका पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. जिस कारण आशंका जताई जा रही है कि कुछ और देश भी अमेरिका पर टैरिफ (US Tariff) लगा सकते हैं. एक्‍सपर्ट्स का कहना है कि इससे ट्रेड वॉर की संभावना बढ़ चुकी है, जिससे महंगाई भी बढ़ने की संभावना है और मंदी की स्थिति भी पैदा हो सकती है.

चीन के रिएक्‍शन से सहमा US मार्केट
चीन द्वारा टैरिफ ऐलान के बाद S&P 500 इंडेक्‍स में 6% की गिरावट आई, जिससे वैश्विक मंदी में ट्रेड वॉर (Trade War) के बढ़ने की आशंका बढ़ गई. मार्च 2020 के बाद से यह एसएंडपी 500 का सबसे खराब सप्ताह था, जब महामारी ने अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया था. Dow Jones में 2,231 अंक (5.5%) की गिरावट आई, जबकि नैस्डैक में 5.8% की गिरावट आई, जो दिसंबर के उच्च स्तर से 20% से अधिक गिर गया है.

11 महीने के निचले स्‍तर पर बाजार
शुक्रवार को, अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंजों में रिकॉर्ड तोड़ 26.79 बिलियन शेयरों का कारोबार हुआ, जो 27 जनवरी 2021 को 24.48 बिलियन के पिछले उच्च स्तर को पार कर गया. नैस्डैक 962.82 अंक गिरकर 15,587.79 पर आ गया, जिससे पुष्टि हुई कि टेक-हैवी इंडेक्स 16 दिसंबर के रिकॉर्ड समापन उच्च 20,173.89 से 20% से अधिक गिरने के बाद एक बीयर बाजार में था.

डॉउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 2,231.07 अंक गिरकर 38,314.86 पर आ गया, जो 4 दिसंबर के रिकॉर्ड बंद स्तर 45,014.04 से सुधार दिखाता है. इस बीच, रॉयटर्स के अनुसार, एसएंडपी 500 322.44 अंक गिरकर 5,074.08 पर आ गया, जो 11 महीनों में इसका सबसे निचला स्तर है.

ग्‍लोबल मंदी का बढ़ रहा खतरा
ट्रंप के पारस्‍परिक टैरिफ के ऐलान के बाद अन्‍य देशों की तरफ से भी टैरिफ लगाने की संभावना बढ़ गई. चीन ने अमेरिका पर 34 फीसदी टैरिफ लगाया है. कनाडा ने भी 25 फीसदी टैक्‍स लगाने का ऐलान किया है. इससे ग्‍लोबल महंगाई बढ़ने का खतरा सामने आ गया है. ट्रंप की ओर से उठाया गया ये कदम दुनिया को ग्‍लोबल मंदी की ओर धकेल रहा है.

टैरिफ के अलावा मंदी का खौफ बढ़ने के ये कारण?
ग्लोबल ट्रेड वॉर का डर: ट्रंप के नए टैरिफ के बाद चीन और कनाडा ने भी जवाबी कदम उठाने की धमकी दी है. इससे निवेशक घबराए हुए हैं. अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 26% और अन्य देशों पर 10% आयात शुल्क लगाया है. जवाब में कनाडा ने अमेरिकी वाहनों पर 25% टैरिफ लागू किया है. इससे ग्‍लोबल ट्रेड वॉर का संकट बढ़ चुका है.

ग्‍लोबल मार्केट में गिरावट: अमेरिका में S&P 500 इंडेक्स 5% और Nasdaq 5.5% गिरा, जो 2020 के बाद सबसे बड़ी गिरावट है. एशियाई बाजार भी टूटे हैं. जापान का निक्केई 3%, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2% नीचे रहा.

सेक्टोरल दबाव: फार्मा स्टॉक्स, IT शेयर और ऑटो शेयरों में भारी दबाव देखा जा रहा है. रिलायंस के शेयरों में भी जबरदस्‍त बिकवाली हो रही है. Nifty IT इंडेक्स 2% गिरा, Coforge और Persistent Systems सबसे बड़े लूजर रहे. मेटल स्टॉक्स में बिकवाली रही.

महंगाई बढ़ने की संभावना: अमेरिका में मंदी बढ़ने का सबसे बड़ा रिस्‍क महंगाई है. कई एक्‍सपर्ट्स का अनुमान है कि अमेरिका में महंगाई तेजी से बढ़ने वाला है, क्‍योंंकि दूसरे देशों से आने वाले समान अब ज्‍यादा कीमत पर मिलेंगे. इससे महंगाई बढ़ेगी. वहीं डॉलर इंडेक्‍स में भी गिरावट देखी जा रही है, जो अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अच्‍छे संकेत नहीं है.

क्‍या बढ़ रहा मंदी का खतरा?
ट्रंप के टैरिफ लगाने के बाद ग्‍लोबल मार्केट में महंगाई बढ़ने की आशंका बढ़ चुकी है, जिससे मंदी का रिस्‍क बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है. डॉयचे बैंक के वरिष्ठ अर्थशास्त्री ब्रेट रयान ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ट्रंप के टैरिफ से इस साल अमेरिकी विकास दर में 1-1.5 प्रतिशत की कमी आ सकती है, जिससे मंदी का जोखिम काफी बढ़ सकता है. हालांकि भारत में अभी ऐसा कोई संकट नहीं है. भारत की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए अच्‍छे संकेत दिखाई दे रहे हैं.

 

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