–फरवरी में रैली निकालकर डिलिस्टिग के लिये सौंपेगा राज्यपाल को ज्ञापन
भोपाल। आगामी माह राजधानी में जनजातीय समुदाय tribal community का विशाल समागम होने जा रहा है। यह धर्मान्तरण conversion के खिलाफ न केवल हुंकार भरेंगा बल्कि धर्मांतरित converts को जनजातीय समुदाय की सूची से बाहर करने की मांग भी करेगा। जनजातीय सुरक्षा मंच के तत्वाधान में यह आयोजन फरवरी में भेल दशहरा मैदान में आयोजित किया गया है। जिसमें करीब 50 हजार से अधिक लोगों के जुटने का दावा किया गया है। यह आयोजन जनजातीय सुरक्षा मंच के तत्वावधान में किया जाएगा।
यह पहला ऐसा अवसर है जबकि विशाल संख्या में धर्मान्तरित व्यक्तियों के विरोध में प्रदेश का जनजातीय समुदाय राजधानी की सड़कों में उतरने जा रहा है। जबकि समुदाय के बीच डीलिस्टिंग की मांग को लेकर जागरूकता और सरकार को बाध्य करने के मद्देजनर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सरकार को चेता रहा है। मामले में सरकार की अनदेखी को देखते हुए अब आगामी माह 10 फरवरी को यह अपनी एक जुटता दिखाने जा रहा है। जिसका उद्देश्य समुदाय की रीति-रिवाज व परंपराएं छोड़ने के बाद भी संविधान द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं प्राप्त कर रहे व्यक्तियों को जनजाति सूची से बाहर करना है। इसमें बैतूल, सिहोर, रायसेन सहित आसपास के जनजातीय समुदाय के लोग प्रमुख रूप से शामिल होंगे।
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दशहरा मैदान से निकलेगी रैली
जनजातीय समुदाय का समागम भेल के दशहरा मैदान में होगा। इसके बाद बोर्ड ऑफिस तक एक रैली भी निकाली जाएगी। जहां मांग से संबंधित राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सरकार के अधिकारियों को सौंपा जाएगा।
देश भर में जाएगा संदेश
डीलिस्टिंग की मांग को लेकर जनजातीय समुदाय की राजधानी में एक जुटता इसलिये भी खास है क्योंकि इसका संदेश पूरे देश को एक साथ जाएगा। वजह यह भी है कि जनजातीय बाहुल्य झारखंड, छत्तीसगढ़ व उड़ीसा जैसै राज्यों के मुकाबले मप्र देश के मध्य में स्थित है और यह दूसरे राज्यों को भी प्रभावित करता है। क्योंकि यहां के 89 ब्लाकों में जनजातीयों का प्रभाव है।
इसलिये डीलिस्टिंग का आंदोलन
सनातन व्यवस्था त्यागकर जनजातीय समुदाय का एक वर्ग भले ही दूसरे धर्म का अनुसरण करने लगा है, लेकिन उसने वह सुविधाएं नहीं छोड़ी है संविधान में जिनका प्रावधान सिर्फ जनजातीय समुदाय के लिये किया गया है। ऐसे में यह वर्ग जनजातीय समुदाय को मिलने वाले हक का अतिक्रमण कर रहा है। लिहाजा जनजातीय समुदाय का मानना है कि ऐसे लोगों को यदि डीलिस्टिंग यानी अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर कर दिया जाए तो इससे वे जहां आरक्षण से दूर हो सकेंगे। वहीं दूसरी ओर योग्य और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों को मिलने वाले आरक्षण के हक का नुकसान नहीं होगा।
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