फिरोजपुर
पंजाब के फिरोजपुर जिले से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान के कसूर शहर में चमड़े की फैक्ट्रियों का पानी भारत के सीमावर्ती गांवों के लोगों के लिए खतरा बनता जा रहा है। भारतीय राजनेताओं और नौकरशाही की उपेक्षा के कारण स्थिति बद से बदतर हो रही है। सतलुज नदी के किनारे पाकिस्तानी शहर कसूर में लेदर टेनरियों से रासायनिक पानी सतलुज में बहाया जा रहा है, जो कि सीमावर्ती गांव टेंडीवाला से भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करता है। यह जहरीला पानी सीमावर्ती जिलों फिरोजपुर और फाजिल्का के लिए घातक स्थिति पैदा कर रहा है। कसूर को एशिया का तीसरा सबसे बड़ा चमड़ा उद्योग बताया जाता है। कसूर के कारण भारतीय सीमावर्ती गांवों में पानी इतना प्रदूषित हो गया है कि त्वचा रोग और बालों के सफेद होने से शुरू हुई समस्या अब कैंसर और हड्डियों सहित कई अन्य रोगों में बदल गई हैं। राजनीतिक उदासीनता का आलम यह है कि भारत ने इस संबंध में कभी भी पाकिस्तान के सामने कोई आपत्ति नहीं जताई है। परिणामस्वरूप हुसैनीवाला के पास 14 सीमावर्ती गांवों के लोग इंसानों के बजाय महज 'मतदाता' बनकर रह गए हैं। इन गांवों के हर घर का कोई न कोई सदस्य किसी न किसी रोग से ग्रसित मिल जाएगा। त्वचा रोग और बालों के सफेद होने की घटनाएं 80 प्रतिशत से अधिक हैं। इसके अलावा युवाओं में हड्डियों के रोग और कैंसर रोग के मामले बढ़ रहे हैं। गंभीर रोगों से जूझ रहे इन गांवों के लोगों के लिए क्षेत्र में कोई अस्पताल भी नहीं है। गांव गट्टी राजोके में एक डिस्पेंसरी है लेकिन वहां कोई डाक्टर नहीं आता। इस संबंध में पर्यावरणविद डा. सतिंदर सिंह का कहना है कि कसूर का चमड़ा उद्योग भारतीय सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है। यहां तक कि छोटे बच्चे भी प्रभावित हो रहे हैं। इस मुद्दे को गंभीरता से लेने की जरूरत है अन्यथा स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाएगी और क्षेत्र में रहना मुश्किल हो जाएगा।
10 में से तीन पशुओं में कैंसर के लक्षण
जिस क्षेत्र में कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, वहां का पानी प्रदूषित होने के कारण ऐसा हो रहा है। इस पानी के कारण पशु भी अब गंभीर रोगों की चपेट में आ रहे हैं। अस्पताल आने वाले 10 में से तीन पालतू पशुओं में कैंसर के लक्षण दिख रहे हैं। सरकारी पशु चिकित्सालयों की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिरोजपुर जिले में कुछ ही वषरें में 32 भैंसों व गायों और 199 कुत्तों को कैंसर होने का पता चला। इसमें निजी पशु चिकित्सालयों के आंकड़े शामिल नहीं हैं।
केंद्र ने 84 लाख रुपये जारी किए थे
2017 में फिरोजपुर के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर रामवीर ने सीमावर्ती क्षेत्र के हालात और प्रदूषित पानी पर केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी थी। इसके बाद केंद्र ने स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 84 लाख रुपये की अनुदान राशि को स्वीकृति दी। परंतु इन क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठाए गए हैं। वहीं वर्तमान डिप्टी कमिश्नर दविंदर पाल सिंह ने अनुदान राशि के बारे में पूछने पर कहा कि वह अभी जिले में उनकी नई नियुक्ति हुई है। उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। मामले का पता करके ही वह आगे कुछ बता पाएंगे।
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