अधिकारियों ने ताक पर रख दिया मंत्री के निर्देश
न हुआ बाबू का निलंबन और ना ही हट पाया नापतौल नियंत्रक

भोपाल। जनता के काम न करने वाले राज्य के अधिकारियों ने मंत्रियों के निर्देश भी ताक में रख दिया हैं। भ्रष्टाचार से जुड़े प्रकरण में मामला नागरिक खाद्य आपूर्ति विभाग अंतर्गत नापतौल विभाग से जुड़ा है। जहां विभागीय अधिकारियों ने मंत्री बिसाहूलाल सिंह द्वारा नोटशीट के माध्यम से दिये गये निर्देशों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। लिहाजा न तो आरोपी बाबू का निलंबन हुआ और न ही निर्देशों के परिपालन मेें नापतौल नियंत्रक को अब तक हटाया जा सका है।
हालांकि सामने आया यह प्रदेश का कोई पहला मामला नहीं है। बावजूद इसके नापतौल विभाग के हालिया प्रकरण को देखते हुए यह विषय एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। क्योंकि बीते दिनों विभाग के जिस सेवानिवृत्ति अधिकारी आरके द्विवेदी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत अभियोजन की कार्रवाई करने व विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 विनोद ठाकुर को निलंबित करने के साथ ही विभाग में पदस्थ नाप तौल विभाग के नियंत्रक को हटाकर वरिष्ठ पर सचिव को अतिरिक्त प्रभार सौंपने के निर्देश दिये गये थे। प्रमुख सचिव खाद्य विभाग को भेजी गई नोटशीट में इन निर्देशों के कारण भी गिनाये गए है। बावजूद इसके मातहत अधिकारियों ने सप्ताह भर बाद भी इसके परिपालन की जरूरत नहीं समझी है। वहीं दूसरी इस मामले में मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने कुछ भी इंकार कर दिया है।
इसलिये नाराज हुए मंत्री
मामले में मंत्री की नाराजगी का आंकलन इसी से किया जा सकता है कि वह नोटशीट में यह लिखने से नहीं चूके हैं कि एक सेवानिवृत्ति अधिकारी द्वारा वर्तमान में कार्यरत कर्मचारी की भांति इस प्रकार का कृत्य किया जाना प्रशासनिक नियंत्रण की कमी को दर्शाता है। विभाग द्वारा आरके द्विवेदी को संरक्षण देने पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं।
यह है मामला
विभाग के सेवानिवृत्ति अधिकारी आरके द्विवेदी ने सहायक ग्रेड-3 विनोद ठाकुर के आवंटित कार्य के विरूद्ध व्यापारियों को फोनकर धमकाने का ऑडियो वायरल हुआ था। इसके बाद तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ नाप तौल मप्र विभाग समिति द्वारा कार्रवाई की जहां मांग की गई थी। वहीं इस कृत्य के कारण व्यापारियों की नाराजगी भी सामने आई थी।
नेता को धमकी देने से कर्मचारी नाराज
इस मामले पर नापतौल विभाग के प्रभारी नियंत्रक कैलाश बुंदेला द्वारा कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी को धमकी देने का मामला सामने आया है। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने नाराजगी जताई है। इनमें तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के साथ शिक्षक संघ व वाहन चालक संघ के नाम शामिल है। आरोप है कि बुंदेला ने 24 मार्च को अपने कक्ष में नाराजगी भरे लहजे से तिवारी को बुलाकर कई गलत टिप्पणियां करने से नहीं चूके है।
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