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उनकी नजर अब हमारी धरती पर, इजरायल से भिड़ने को तैयार एक और मुस्लिम देश, राष्ट्रपति ने क्यों चेताया

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नई दिल्ली
यूरेशिया के मुस्लिम बहुल देश तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने इजरायल को लेकर बड़े खतरे की ओर इशारा किया है। बुधवार को एर्दोगन ने कहा कि इजरायल की नजर अब तुर्की पर है। अंकारा में तुर्की संसद को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कहा कि अगर इजरायल को नहीं रोका गया तो उसका अगला निशाना तुर्की होगा। राष्ट्रपति एर्दोगन ने यह भी कहा कि हमास इजरायल से दो-दो हाथ कर तुर्की की रक्षा कर रहा है। 7 अक्तूबर को हमास के इजरायल पर हमले के बाद से इजरायली सेना लगातार गाजा में मौत बरसा रही है। इस दौरान कई बार तुर्की राष्ट्रपति ने हमास का समर्थन किया है और इजरायल को गाजा में नरसंहार का दोषी करार दिया है।

बुधवार को संसद को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने कहा, “इजरायल न केवल गाजा में फिलिस्तीनियों पर हमला कर रहा है; बल्कि हम पर भी हमला कर रहा है। हमास गाजा में अनातोलिया की अग्रिम पंक्ति की रक्षा कर रहा है।" बता दें कि तुर्की यूरोप और एशिया दोनों महादेशों के बीच स्थित है। इसके एशियाई भाग को अनातोलिया और यूरोपीय भाग को थ्रेस कहा जाता हैं। तुर्की नाटो का सदस्य देश है।

तुर्की राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दोनों देशों के बीच द्वीपक्षीय संबंधों में तेज गिरावट आई है। तुर्की ने इस महीने की शुरुआत में ही इजरायल के साथ सभी तरह के व्यापार रोक दिए हैं और गाजा पट्टी में मानवीय सहायता की बेरोक-टोक आपूर्ति करने और वहां तत्काल युद्धविराम की मांग की है। इसके साथ ही तुर्की ने इजरायल को 35000 फिलिस्तीनियों की हत्या और 85000 लोगों के घायल होने का दोषी करार दिया है।

आगे की संभावनाओं को साफ करते हुए राष्ट्रपति एर्दोगन ने कहा, "किसी को भी हमसे यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि हम अपने शब्दों में नरमी लाएंगे। वे (इजरायल) उतने ही खराब हैं जितने कि वे बर्बर हैं। उन्होंने लोगों को सबसे घातक हथियारों, भूख और प्यास से मार डाला। उन्होंने लोगों को उनके घरों से बाहर निकाला और उन्हें कथित तौर पर सुरक्षित क्षेत्रों में जाने का निर्देश दिया। फिर सुरक्षित क्षेत्रों में नागरिकों का नरसंहार किया है।" इससे पहले अप्रैल में एर्दोगन ने हमास की तुलना तुर्की के क्रांतिकारी ताकतों से की थी, जिसने 1920 के दशक में अनातोलिया से विदेशी सेनाओं को खदेड़ने में मदद की थी।

यह बात गौर करने वाली है कि सात महीने पहले 7 अक्तूबर को जब हमास ने इजरायल पर हमला बोला था, तब तुर्की ने इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार के प्रति अपनी आलोचना पर चुप्पी साधी थी और इजरायली नागरिकों पर हमास के हमलों की निंदा की थी। लेकिन जब इजरायल ने गाजा पट्टी में तबाही मचानी शुरू कर दी और आमलोगों पर मौत के गोले बरसाने लगा, तब तुर्की ने अपना स्टैंड बदल लिया और इजरायल से अपने राजदूत को वापस बुला लिया। इसके जवाब में इजरायल ने भी अपने राजनयिकों को अंकारा से वापस बुला लिया था।

मिडिल ईस्ट आई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में तुर्की में हुए स्थानीय चुनावों में नुकसान झेलने के बाद तुर्की सरकार ने इजरायल की आलोचना तेज कर दी और नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। तुर्की ने भी अब घोषणा की है कि वह अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका द्वारा लाए गए नरसंहार मामले में शामिल होगा। हालांकि, इस बीच इजरायल ने छह महीने बाद फिर से अपने राजदूतों को तुर्की भेजना शुरू कर दिया है।

2018 में भी गाज़ा में फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इसरायल की हिंसक कार्रवाइयों के विरोध में तुर्की ने अपने राजदूत को तेल अवीव से वापस बुला लिया था। इसके बाद चार साल तक दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनातनी बनी रही थी। 2022 में जाकर दोनों देशों के रिश्ते पटरी पर लौटे थे लेकिन अब फिर से रिश्ते बेपटरी हो चुके हैं। बता दें कि 1948 में जब इजरायल ने स्वतंत्रता की घोषणा की थी, तब साल भर के अंदर तुर्की ने उसकी संप्रभुता को मान्यता दी थी और ऐसा करने वाला तुर्की दुनिया का पहला मुस्लिम बहुल देश बना था।

 

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