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जाने क्या होता है “डिजिटल अरेस्ट”, साइबर अपराध का नया तरीका

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भोपाल/ नई दिल्ली
डिजिटल दुनिया में साइबर ठग लोगों को अपना शिकार बनाने के लिए रोज नया-नया तरीका अपनाते हैं. आधुनिक तकनीकों के माध्यम से अपराधी कहीं दूर से ही लोगों को शिकार बना लेते हैं और पुलिस की पकड़ से भी बाहर हो जाते हैं. ठगों ने लोगों को अपनेचंगुल में फंसाने के लिए अब एक और नया तरीका अपनाया है, जिसका नाम है 'डिजिटल अरेस्ट'. डिजिटल जमाने में अपराध के नित नए रूप सामने आ रहे हैं। साइबर पुलिस के सामने ऐसे मामले सामने आ रहे हैं कि अपराध के तरीके को जानकर पुलिसवाले भी हैरान हैं। मध्‍य प्रदेश में लगातार डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर ठग आपराधिक वारदात को अंजाम दे रहे हैं। यही कारण है कि साइबर क्राइम पुलिस को एक एडवाइजरी जारी करनी पड़ी है। साइबर क्राइम पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है कि यह साइबर अपराध का नया तरीका है। इसको लेकर सावधान रहने की जरूरत है। आज हम आपको डिजिटल अरेस्ट क्या है और इससे कैसे बच सकते हैं? इसके बारे में बताएंगे.

ऐसे हो रहे अपराध
साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार ऑनलाइन ठगों ने अब लोगों के साथ ठगी का नया तरीका निकाला है। यह ठग कुरियर पैकेट में मिले सिम, इंक्स, आधार कार्ड का दुरुपयोग करके, मनी लॉन्ड्रिंग, टेररिस्ट कन्वर्जन में नागरिकों का मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसी कई ट्रिक से ठग नागरिकों को हाउस अरेस्ट कर लेते हैं। इसके बाद ठगों द्वारा पुलिस स्टेशन जैसे सेटअप दिखाकर वीडियो कॉल करके डराया जाता हैं। पूछताछ के नाम पर वेबकैम, स्काइप मोबाइल से वीडियो कॉल पर आमने-सामने बैठाकर रखते हैं।

इस दौरान नकली पुलिस अफसरों से भी अलग-अलग नंबरों पर बात कराई जाती है। फिर जमानत के नाम पर ओटीपी मांग लिया जाता है। नागरिक डर जाते हैं और अपने बैंक खातों संबंधी जानकारी ठग को दे देते हैं।

क्या है डिजिटल अरेस्ट?
डिजिटल अरेस्ट…यह साइबर क्राइम का नयाब तरीका है. साइबर फ्रॉड लोगों को फंसाने के लिए ब्लैकमेलिंग का खेल खेलता है और लोग उसके जाल में फंस जाते हैं. डिजिटल अरेस्ट में साइबर फ्रॉड वीडियो कॉल के जरिए आप पर हावी होता है और आपको घर में ही बंधक बना लेता है. सबसे पहले ठग आपको पुलिस का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करता है. फिर बताया जाता है कि आपका आधार कार्ड, सिम कार्ड, बैंक अकाउंट का उपयोग किसी गैरकानूनी काम के लिए हुआ है. यहां से आपको डराने-धमकाने का 'खेल' शुरु होता है.

साइबर ठग गिरफ्तारी का डर दिखाकर आपको घर में ही कैद कर देते हैं. ठग वीडियो कॉल में अपने बैकग्राउंड को किसी पुलिस स्टेशन की तरह बना लेते हैं, जिसे देखकर पीड़ित डर जाता है और वह उनके बातों में आ जाता है. ठग जमानत की बात कहकर आपसे ठगी शुरु करते हैं. अपराधी आपको वीडियो कॉल से ना हटने देता है ना ही किसी को कॉल करने देते हैं.

पुलिस ने दी सलाह
साइबर क्राइम पुलिस ने सलाह दी है कि नागरिक सतर्क रहें। जांच एजेंसियों के नाम से आ रहे फोन पर बात नहीं करें। जमानत के नाम पर डरकर अपना ओटीपी न दें। किसी भी खाते में रुपये जमा न कराएं। साथ ही जालसाजों के कहने पर कोई भी ऐप डाउनलोड नहीं करें।

सूचना दें, कॉल करेंपुलिस के अनुसार जब व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट के झांसे में आ जाता है तो यह ठग व्हाट्सएप नंबर पर रोजाना हाजिरी भी लगवाते हैं। इसमें व्यक्ति को रोजाना प्रजेंट सर लिखकर ग्रुप पर भेजना होता है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार नागरिकों के पास इस प्रकार का कोई फोन आए तो तुरंत स्थानीय पुलिस से संपर्क करना चाहिए। नागरिक 1930 नंबर पर भी सूचना दे सकते हैं।

ऑनलाइन जालसाजों ने न केवल उससे 14.57 लाख रुपये ठग लिए, बल्कि मादक परीक्षण करने के बहाने उसे कैमरे के सामने नग्न होकर पोज देने को भी कहा. बाद में उन्होंने धमकी दी कि अगर उसने उन्हें 10 लाख रुपये नहीं दिए तो वे उसके वीडियो सार्वजनिक कर देंगे.

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