आईटी सेक्टर में प्रोफेशनल्स की मांग बनी हुई है। आज भी यह सेक्टर ट्रेंड प्रोफेशनल्स की कमी से जूझ रहा है। यह जरूरी नहीं कि इस क्षेत्र में प्रवेश लेने के लिए आपके पास बड़ी-बड़ी डिग्रियां हों। वेबसाइट बनाने से लेकर कई अन्य प्रोग्राम्स बनाने में कंप्यूटर लैंग्वेज का हुनर जरूरी है। प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीख कर आप आईटी क्षेत्र में कैसे प्रवेश कर सकते हैं, बता रहे हैं हम….
विभिन्न सर्वेक्षणों से यह बात सामने आई है कि आईटी सेक्टर में जॉब की कोई कमी नहीं है। देश में ही नहीं, ट्रेंड प्रोफेशनल्स के लिए विदेशों में भी नौकरी के अवसर बने हुए हैं। बस जरूरत है तो अपनी रुचि पहचान कर उसका विशेषज्ञ बनने की। अगर आप भी आईटी सेक्टर में करियर का सपना बुन रहे हैं तो आपको कुछ प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पर मजबूत पकड़ बनानी होगी। दरअसल ये लैंग्वेज मोबाइल एप और वेबसाइट्स बनाने से लेकर डेटा एनालिसिस जैसे कई कार्यों में मददगार होती हैं।
जावास्क्रिप्ट
इस समय नए-नए व उपयोगी एप्स बनाने में जावास्क्रिप्ट की बड़ी भूमिका है। जावा और जावास्क्रिप्ट में सिर्फ नाम की ही समानता है। जावास्क्रिप्ट का इस्तेमाल वेब एप्स बनाने में किया जाता है। मॉडर्न वेब को बनाने में जावास्क्रिप्ट का इस्तेमाल बखूबी किया जा रहा है। इसका इस्तेमाल करने वालों को बस एक शिकायत रहती है कि इसकी वजह से वेबसाइट की ब्राउजिंग धीमी हो जाती है। इसके अलावा आज जावास्क्रिप्ट का इस्तेमाल वेब पेजेज में फॉर्म्स ऑथेंटिकेशन, ब्राउजर डिटेक्शन और डिजाइन इम्प्रूव करने में किया जा रहा है। आपके फेवरेट ब्राउजर क्रोम एक्सटेंशंस, एपल के सफारी एक्सटेंशंस, एडोब एक्रोबैट रीडर और एडोब क्रिएटिव सूट जैसी एप्लिकेशंस जावास्क्रिप्ट कोडिंग के बिना अधूरी हैं। मशहूर एप्स और ब्राउजर को तो आपने कई बार इस्तेमाल किया होगा, क्यों न इनके अपग्रेड हो रहे सफर में शामिल हुआ जाए।
पीएचपी
आज अधिकतर वेबसाइट्स पीएचपी पर बनाई जाती हैं। याहू, फेसबुक, वर्डप्रेस जैसी कई कंपनियों ने न सिर्फ अपनी वेबसाइट्स इसी लैंग्वेज में बनाईं, बल्कि साइट के रखरखाव में भी इसी लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप भी चाहते हैं कि ऐसी किसी बड़ी कंपनी में बतौर प्रोफेशनल जुड़ें तो लैंग्वेज की जानकारी इन कंपनियों में जॉब पाने का एक माध्यम बन सकती है। वेबसाइट्स बनाने के लिए पीएचपी बहुत ही कॉमन लैंग्वेज है। हालांकि कई प्रोग्रामर्स ऐसे भी हैं, जिन्हें प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के तौर पर पीएचपी पसंद नहीं। हाई-स्पीड स्क्रिप्टिंग और ऑगमेंटेड कंपाइलिंग कोड प्लगिंग्स जैसी खासियतों के चलते इस लैंग्वेज का फ्यूचर ब्राइट है। पीएचपी से जुड़े कोर्स कर लेने के बाद आप वेब डिजाइनर और वेब डेवलपर जैसे पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे। दरअसल पीएचपी सर्वर स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज है, जिसका इस्तेमाल वेब डेवलपमेंट के साथ आम प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में भी होता है। ओपन सोर्स होने की वजह से पीएचपी का आज 24 करोड़ से ज्यादा वेबसाइट्स और 20 लाख वेब सर्वर्स में इस्तेमाल हो रहा है। वेब डिजाइनर के रूप में आप शुरुआत में 15 हजार से 20 हजार रुपए पा सकते हैं। अनुभव के बाद अच्छी सेलरी मिलती है।
सी
सी सबसे पुरानी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में से एक है। यहां तक कि कंप्यूटर की थोड़ी बहुत जानकारी रखने वाले के लिए भी सी जाना-पहचाना नाम है। आज भी बहुत सी आईटी कंपनियों में सी प्रोग्रामर की बहुत डिमांड है। इस लैंग्वेज को 70 के दशक में विकसित किया गया था। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि 1978 में द सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज नाम की 800 पन्नों की एक किताब तक छप गई। यह किताब आज भी मशहूर है। सी लैंग्वेज को सीखने और इसमें एक्सपर्ट होने के बाद आपके लिए देश-विदेश में जॉब की कोई कमी नहीं होगी। आप इस क्षेत्र में काफी आगे तक जा सकते हैं।
जावा
आज इस लैंग्वेज का इस्तेमाल न सिर्फ कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में किया जाता है, बल्कि मोबाइल फोन आदि की एप्लिकेशन में भी इसके बगैर काम नहीं चलता। दरअसल जावा ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड स्क्रिप्टिंग लैंग्वेज है। इसे क्लाइंट-साइड लैंग्वेज भी कहा जाता है, क्योंकि ईजी कमांड्स, ईजी कोड्स होने की वजह से यह क्लाइंट-साइड वेब ब्राउजर में इस्तेमाल की जाती है। जावा कोर्स करके आप वेब डेवलपर, प्रोग्रामर जैसी जॉब के लिए कोशिश कर सकते हैं। इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की सहायता से एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर बनाना आसान होता है। जावा एक बड़ी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है, इसीलिए कंपनी ने इसे कई भागों में बांटा हुआ है। यानी आप बतौर प्रोग्रामर्स जिस वर्ग से संबंधित सॉफ्टवेयर का विकास करना चाहते हैं, उसी में विशेषज्ञता हासिल करें। जावा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पोर्टेबिलिटी व सुरक्षा है। आज दुनियाभर में यह सबसे लोकप्रिय प्रोग्रामिंग लैंग्वैज है। आज हर दिन नई-नई एप सामने आ रही हैं। इन एप को बनाने में जावा की अहम भूमिका होती है।
ऑब्जेक्टिव सी
सी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज काफी पुरानी और एक सफल लैंग्वेज रही है। इसी से प्रेरित होकर बाद में इससे मिलते-जुलते नाम से अन्य लैंग्वेज भी विकसित की गईं। इन्हीं में से एक है ऑब्जेक्टिव सी। सी से प्रेरित होकर बनी इस लैंग्वेज में कई नए एडवांस फीचर जोड़े गए। अगर आप चाहते हैं कि भविष्य में आईफोन के एप्स बनने में आपकी भी भूमिका हो तो यह लैंग्वेज आपके करियर को ऊंचाइयों तक ले जा सकती है। दरअसल इस लैंग्वेज का इस्तेमाल आमतौर पर आईफोन की एप्स बनाने में किया जा रहा है। वैसे एपल कंपनी ऑब्जेक्टिव सी के साथ अपनी बनाई हुई लैंग्वेज का भी इस्तेमाल करती है। यूं समझें कि ऑब्जेक्टिव सी आपको एक बेहतरीन करियर देने के लिए बनी है।
पर्ल
जब भी टेक्स्ट प्रोसेसिंग की बात आती है तो पर्ल लैंग्वेज को ही याद किया जाता है। पर्ल लैंग्वेज को 80 के दशक में नासा के एक इंजीनियर ने बनाया था। बतौर प्रोग्रामिंग लैंग्वेज यह एक प्रभावशाली भाषा है। इंजीनियर्स इसे द डक्ट टेप ऑफ द वेब टैग नाम से जानते हैं। इस भाषा में प्रोग्रामिंग करना न सिर्फ आसान है, बल्कि काफी फ्लैक्सिबल भी है। पर्ल को मल्टीटास्किंग लैंग्वेज के रूप में जाना जाता है। सिस्टम प्रोग्रामिंग की कितनी ही मुश्कि लें क्यों न हों, पर्ल लैंग्वेज में सभी हल हैं। इस भाषा में लिखी गई प्रोग्रामिंग पर्ल स्क्रिप्ट के रूप में जानी जाती है। पर्ल की कई खूबियां हैं, जो अपनी समकक्ष भाषाओं से बेहतर दिखती हैं। नेटवर्क एक्सपर्ट्स के लिए इस लैंग्वेज को सीखना बेहद जरूरी होता है। वहीं एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि अगर आप इस कंप्यूटर भाषा में पारंगत हो जाते हैं तो कंपनियां आपको जॉब देने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
मिलती है अच्छी सेलरी
अगर आप फ्रेश ग्रेजुएट हैं और अपनी वर्तमान जॉब से संतुष्ट नहीं हैं तो किसी एक भाषा को सीख कर अपने करियर को रफ्तार दे सकते हैं। एप डेवलपर की औसत सैलरी जहां 35 हजार है, वहीं सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में उतरे युवाओं को शुरुआत में 30 से 35 हजार रुपए सैलरी मिल रही है। वर्तमान में सी, जावा आदि लैंग्वेज की जानकारी अधिक वेतन दिला रही है। इस क्षेत्र में बढ़ता अनुभव देश में ही नहीं, विदेश में भी अवसरों के द्वार खोलता है। इस क्षेत्र के धुरंधर डेवलपर्स के अनुभव को देखा जाए तो सभी का अनुभव 10 वर्ष से कम है।
लैंग्वेज, जिन्हें सीखना भी न भूलें
कुछ लैंग्वेज ऐसी होती हैं, जो प्रोग्रामिंग में सहायक की भूमिका निभाती हैं। इन्हीं की मदद से कुछ विशेष फीचर का इस्तेमाल किया जाता है। मुख्य लैंग्वेज के साथ इनमें से किसी को भी सीखना आपके लिए बेहतर रहेगा।
विजुअल बेसिक
विजुअल बेसिक लैंग्वेज को माइक्रोसॉफ्ट ने डेवलप किया है। विजुअल बेसिक लैंग्वेज प्रोग्रामिंग को आसान करती है। इसमें ग्राफिक एलिमेंट दिया गया है, जिसे ड्रैग और ड्रॉप करके प्रोग्रामर प्रोग्राम मंे कुछ बदलाव कर सकता है।
रूबी
डेवलपर्स की चहेती बनी इस लैंग्वेज में कोडिंग करना बेहद आसान है। मजेदार बात है कि इसकी कोडिंग को याद रखना भी मुश्किल नहीं है। इस लैंग्वेज का इस्तेमाल विशेषतः वेब एप्स बनाने में ही किया जाता है। प्रोग्रामर का बेस्ट फ्रेंड मोटो लिए यह लैंग्वेज अपनी विशेषताओं को बयां करती है। शुरुआती दौर में इसे सीख कर रोजगार पाने में आसानी रहती है।
पायथन
पायथन को 1989 में डेवलप किया गया था। इसके कोड्स पढ़ने में काफी आसान हैं, इसलिए डेवलपर्स इस प्रोग्रामिंग लैंग्वेज को काफी पसंद करते हैं। कई प्रोग्रामर्स का कहना है कि ये प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सीखने और प्रोग्रामिंग की शुरुआत करने वालों के लिए सबसे आसान लैंग्वेज है।
सीएसएस
वेबसाइट की फॉर्मेटिंग व ले आउट डिजाइनिंग में यह लैंग्वेज मददगार होती है। इसका पूरा नाम है कासकेडिंग स्टाइल शीट। वेबसाइट्स और मोबाइल एप्स के मेन्यू इसी भाषा के जरिए लिखे जाते हैं। यह जावा स्क्रिप्ट और एचटीएमएल के साथ बेहतर तालमेल बिठाती है। आप इस लैंग्वेज को एक अतिरिक्त लैंग्वेज के तौर भी जरूर सीखें। आपके सीवी में यह एक अतिरिक्त योग्यता को दर्शाएगा। गूगल डाटा एनालिसिस करने के लिए इसका ही इस्तेमाल करता है।
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