–प्रासिक्यूशन रिलीफ के अध्यक्ष शिबू थॉमस पर है विदेशों में भारत की छवि खराब करने का आरोप
–पूछा जिम्मेदारों ने क्यों नही की ठोस कार्यवाई
भोपाल। मप्र उच्च न्यायालय ने देश द्रोह से जुड़े एक प्रकरण में राज्य सरकार से 6 सप्ताह में जबाव मांगा है।
गलत तथ्यों को प्रस्तुतकर विदेशों में भारत की छवि खराब करने के लिये प्रासिक्यूशन रिलीफ के अध्यक्ष शिबू थॉमस को जिम्मेदार ठहराते हुए यह याचिका लीगल राइट प्रोटेक्सन फोरम द्वारा दाखिल की गई थी। जिस पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक ने शुक्रवार सुनवाई करते हुए इस मामले में पक्ष रखने को कहा है।
दरअसल 2019 में प्रकाशित रिपोर्ट में ईसाई संस्थाओं और अनाथालयों में उत्पीड़न की घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रासिक्यूशन रिलीफ के अध्यक्ष शिबू थॉमस ने ननों, पादरियों आदि के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करना, उनकी इच्छा के विरुद्ध बच्चों के बीच रात में निकासी के आरोप लगाए थे।
लीगल राइट प्रोटेक्सन फोरम द्वारा प्रस्तुत याचिका की श्री गौतम के साथ पैरवी कर रहे अधिवक्ता पंकज सिंह ने बताया कि चूंकि इन आरोपो को संस्था अध्यक्ष के नाते थॉमस सिद्ध नही कर पाए है। आयोग या पुलिस को साक्ष्य भी नहीं दिया। इसलिये उनके खिलाफ धारा 124 A के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिये। हमारी इस मांग को संज्ञान में लेते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए 6 सप्ताह में यह जबाव मांगा है कि आपने अभी तक इस मामले में क्या किया है और प्रकरण में आरोपी के खिलाफ देशद्रोह का अपराध दर्ज करने की जरूरत क्यों नही समझी गई।
इसलिये आयोग को मिला नोटिस
हालांकि सबसे पहले आयोग के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने इस मामले में बच्चों का जिक्र सामने आने के बाद प्रकरण को संज्ञान में लिया था और राज्य सरकार को कार्यवाई करने और देशद्रोह के तहत प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिये थे। इसके बाद भी पुलिस ने थॉमस के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज करने की हिम्मत नही जुटाई। चूंकि मामला बच्चों से भी जुड़ा रहा है, लिहाजा कार्यवाई नही करने पर याचिकाकर्ता ए एस संतोष ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग, राज्य सरकार के साथ भोपाल डीआईजी व प्रासिक्यूशन रिलीफ के अध्यक्ष शिबू थॉमस को परिवादी बनाया गया है।
परिवाद के लिये यह बनाया आधार
-प्रासिक्यूशन रिलीफ यूएस आधारित संगठन है, भारत में नफरत और सांप्रदायिक विभाजन फैला रहा है और सक्रिय रूप से इसमें शामिल है।
-इसका अध्यक्ष शिबू थॉमस संयुक्त राज्य अमेरिका का नागरिक है, जो भारत में रह रहा है।
-यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा गारंटीकृत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में अंतर्राष्ट्रीय मंचों में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सामने भारत की छवि खराब कर रहा है।
-इनके द्वारा भारत के खिलाफ सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने और अंतरराष्ट्रीय मंचों, मंचों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों पर भारत को बदनाम करने के लिए कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई।
याचिका में यह मांग
-राज्य सरकार, डीआईजी भोपाल व राष्ट्रीय बाल आयोग को धारा 124ए, 295ए, 505(1)(ए) और (ए) के तहत
प्रासिक्यूशन रिलीफ के अध्यक्ष शिबू थॉमस के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश ज़ारी किया जाय।
-प्रासिक्यूशन रिलीफ के द्वारा 2019 में प्रकाशित रिपोर्ट के वितरण को प्रतिबंधित किया जाय।
-वार्षिक रिपोर्ट 2019 के आगे वितरण को रोकने के लिए तुरंत निर्देश जारी करने की कृपा क
-राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को यह स्पष्ट करने के लिये निर्देशित करें कि इस मामले में प्रतिवादी प्रासिक्यूशन रिलीफ के अध्यक्ष शिबू थॉमस के खिलाफ अब तक क्या कदम उठाए हैं?
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