तकनीकी शिक्षामंत्री का निर्णय, कॉलेजों में मनमर्जी रोकने खत्म की जाएंगी सोसायटी
भोपाल
प्रदेश की सभी पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों की सोसायटी खत्म कर उन्हें शासन में समाहित करने की व्यवस्था बनाई जा रही है। तकनीकी शिक्षामंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने ये निर्णय लिया है। इससे प्रोफेसरों को ग्रेच्युटी के साथ सेवानिवृत्ति में मिलने वाले सभी प्रकार लाभ मिलेंगे। इससे डार्इंग कैडर में तब्दील हो चुके विभाग को संजीवनी मिल जाएगी। वहीं सोसायटी के समस्त पदों को डार्इंग कैडर में शामिल कर दिया जाएगा। उनके शासन में मर्ज होने से प्रोफेसर और लेक्चरर का स्थानांतरण भी हो सकेंगे।
प्राचार्य, विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर और लेक्चरर के पदों को सोसायटी में बदलने के बाद विभाग पर उनका कोई नियंत्रण नहीं बचा था। गलती करने पर शासन उन्हें दंडित करने हुये स्थानांतरण करता है, वे हाईकोर्ट से स्थानांतरण के विरुद्ध स्थगन आदेश ले आते हैं। निमयानुसार सोसायटी में प्रोफेसरों को स्थानांतरण नहीं हो सकता। शासन उन्हें दंडित नहीं कर सकता, जिसके कारण वे मनमर्जी करते हैं। कई बार शासन को कोर्ट की एवज में प्रोफेसरों के सामने झुकना पड़ता है। 69 पालीटेक्निक और छह कालेजों में करीब 2250 प्रोफेसर और लेक्चरर पदस्थ हैं। 1900 प्रोफेसर कालेजों से सोसायटी में चले गए हैं। शेष पद उनके सेवानिवृत्त से खत्म होंगे।
कैसे होती मनमर्जी
आलम यह है कि दमोह पालीटक्निक में अंग्रेजी की शिक्षक लता त्रिपाठी को प्राचार्य का प्रभार दिया हुआ है। जूनियर होने के कारण वे अपनी मनमर्जी करती हैं। इसी तरह अशोक नगर पालीटेक्निक प्राचार्य कैलाश नारायण झा को जानकारी है कि उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। इसलिये वे शासन के अदोश तक को नजरअंदाज कर देते हैं। यही कारण है कि आशोकनगर पालीटेक्निक में शिक्षकों को प्रमोशन नहीं मिल सके हैं। ऐसी स्थिति राज्य के अन्य पालीटेक्निक में व्याप्त हैं।
गिनती के प्राचार्य शेष
राज्य में गिनती के प्राचार्य बचे हैं। इसमें उज्जैन पालीटेक्निक प्राचार्य आशीष डोंगरे, महिला पालीटेक्निक में केबी राओ, पालीटेक्निक विंग में सचिव त्रिलोक कुमार श्रीवास्तव, डीटीई में चंद्रशेखर ढबू, आरएन तिवारी इंदौर, आरएस लौहवंशी इटारसी, भवानी प्रसाद गुप्ता कल निकेतन जबलपुर और जीवी बावनकर जावरा में पदस्थ हैं। राज्य में सिर्फ 13 फीसदी प्राचार्य हैं, शेष 87 फीसदी पालीटेक्निक में सीनियर लेक्चरर प्रभारी प्राचार्य बने हुए हैं। शासन ने 2004 भर्ती नियम जारी कर रखे हैं। इसमें लेक्चरर की डीपीसी कर प्रमोशन करने की व्यवस्था नहीं हैं।
सोसायटी से रोस्टर नहीं होगा लागू
प्रदेश में पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग कालेज सोसायटी में संचालित है। इसमें प्राचार्य, एचओडी और लेक्चरर के एक-एक पद बने हुए हैं। ऐसे में कॉलेज और पॉलीटेक्निक को एक-एक यूनिट बनाकर भर्ती करते हैं, तो रोस्टर का पूरा पालन नहीं हो पाएगा। इसके चलते अधिकारियों को कोर्ट कचहरी करना होगी। जबकि यूजीसी ने विवि और कालेज को एक यूनिट मानकर भर्ती करने के आदेश जारी किए हैं।
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