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हर्पीज का आयुर्वेदिक इलाज: 5 प्रमुख उपाय

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गंभीर त्वचा रोगों में हर्पीस भी एक है, जो एक बार हो जाने के बाद परेशान बहुत करता है। हर्पीस, जोस्टर वायरस और सिम्प्लेक्स वायरस के कारण होने वाला एक रोग है यह वायरस व्यक्ति से व्यक्ति में फैल भी सकता है। इसके लक्षण त्वचा पर छाले के रूप में नजर आते हैं।

यह रोग महिलाओं में को ज्यादा होता है और पुरुष भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसलिए समय रहते इसका इलाज बहुत जरूरी है।

अधिकतर लोग हर्पीस के इलाज के लिए एलोपैथिक दवाइयों पर जोर देते हैं। लेकिन, दवाइयों के साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आंवला

आंवला में विटामिन सी की मात्रा पाई जाती है और साथ ही इसमें एंटीवायरल गुण होते हैं, जो हर्पीस संक्रमण के खिलाफ लड़ने में मददगार हो सकते हैं। विटामिन सी एक तरह का एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर को स्वस्थ रखने के साथ इम्यून सिस्टम की स्ट्रेंथ को भी बढ़ाता है।

तुलसी

तुलसी के पत्ते में एंटीवायरल गुण होते हैं, जो वायरस के खिलाफ लड़ने में सहायक हो सकते हैं। अगर आप हर्पीस की समस्या से परेशान हैं, तो खाने में तुलसी के साथ प्रभावित हिस्से में तुलसी का लेप भी लगा सकते हैं।

नीम

नीम के पत्ते और तेल में एंटीवायरल गुण होते हैं जो हर्पीस वायरस के खिलाफ लड़ने में सहायक हो सकते हैं। नीम के पत्ते में विटामिन सी, विटामिन ई, कैरोटीनॉयड और अन्य प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं।

त्रिफला

त्रिफला एक प्राचीन आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में किया जाता है। त्रिफला का सेवन हर्पीस के इलाज में मददगार हो सकता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेंट और विभिन्न औषधीय गुण होते हैं, जो संक्रमण के खिलाफ लड़ने में मददगार हैं।

कच्ची हल्दी

कच्ची हल्दी का सेवन शरीर से कई संक्रमण को दूर भगाता है। कच्ची हल्दी में करक्यूमिन नामक एक प्राकृतिक एक्टिव इंग्रीडिएंट होता है जो उसकी गुणकारी गुणों की मुख्य स्रोत है। इसका सेवन इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने के साथ संक्रमणों के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार करता है। हर्पीस से बचाव के लिए इसका सेवन भी फायदेमंद है।

 

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