उज्जैन
अब जल्द ही आकाशवाणी उज्जैन से प्रसारित सभी कार्यक्रम एफ.एम. 102.5 मेगाहर्ट्ज पर सुने जा सकेंगे। यह उज्जैनवासियों के लिए गर्व का विषय है कि महाकाल की नगरी से प्रसारित स्वर अब पूरे क्षेत्र में गूंजेंगे। एफ.एम. पर सुनाई देने वाले इन कार्यक्रमों में ग्राम सभा, महिला सभा और युवा वाणी जैसे विशेष कार्यक्रम शामिल होंगे। प्रसारण के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, भाषा, लोकजीवन और सामाजिक संदेशों को व्यापक स्तर पर प्रसारित किया जाएगा।
कार्यक्रम अधिकारी ने दी संपूर्ण जानकारी
पूरे प्रशिक्षण सत्र के संचालन और आकाशवाणी की दिशा के बारे में विस्तृत जानकारी कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी भोपाल राजेश भट्ट ने दी। उन्होंने प्रतिभागियों को समझाया कि आकाशवाणी किस प्रकार जनमानस से संवाद स्थापित करती है और उद्घोषक इस प्रक्रिया की धुरी होते हैं। भट्ट ने बताया कि ग्राम सभा, महिला सभा और युव वाणी इन तीनों कार्यक्रमों की प्रकृति अलग-अलग है, इसलिए उद्घोषकों को अपनी शैली और शब्द चयन पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि उज्जैन केंद्र की शुरुआत केवल एक संस्थागत प्रसारण नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और जनसमुदाय तक पहुंचाने का भी अभियान है। आपने बताया कि रेडियो की पहुंच आज भी बेहद व्यापक है और स्मार्टफोन तथा कार रेडियो के जरिए नई पीढ़ी भी बड़ी संख्या में एफ.एम. से जुड़ रही है।
उत्साह से भरे प्रतिभागी
प्रशिक्षण के पहले ही दिन चयनित प्रतिभागियों का उत्साह देखने लायक था। सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और उद्घोषणा की बारीकियों को सीखने में गहरी रुचि दिखाई। कई प्रतिभागियों ने वरिष्ठ उद्घोषकों से संवाद करते हुए अपने संदेह दूर किए। प्रशिक्षणार्थियों का मानना था कि यह अवसर उनके लिए जीवन बदल देने वाला साबित होगा, क्योंकि वे न केवल एक मंच पा रहे हैं बल्कि समाज में अपनी पहचान बनाने का भी अवसर प्राप्त कर रहे हैं। आने वाले दिनों में उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण, स्टूडियो प्रबंधन और कार्यक्रम निर्माण की जानकारी भी दी जाएगी, जिससे वे आकाशवाणी की परंपरा को और समृद्ध बना सकें।
भाषा का बताया उपयोग
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि अलग-अलग कार्यक्रमों में भाषा की शैली कैसे बदलती है। ग्राम सभा में सहज और ग्रामीण परिवेश से जुड़ी भाषा, महिला सभा में संवेदनशील और प्रेरक भाषा तथा युवा वाणी में ऊर्जा से भरी आधुनिक भाषा का प्रयोग विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर प्रशिक्षण के मार्गदर्शन हेतु कई अनुभवी उद्घोषक भी उपस्थित रहे। इंदौर से आए संजीव मालवीय, भोपाल केंद्र से पुरुषोत्तम और वर्तमान में उज्जैन की प्रभारी श्रीमती अनामिका चक्रवर्ती ने चयनित प्रतिभागियों को अपने अनुभव साझा किए। इन वरिष्ठ उद्घोषकों ने उद्घोषण की बारीकियों, प्रसारण अनुशासन और श्रोताओं से जुड़ने के तरीकों पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उद्घोषक को केवल शब्द नहीं बोलने चाहिए बल्कि उन शब्दों में भावनाएं और संवेदनशीलता झलकनी चाहिए। प्रशिक्षणार्थियों ने इन अनुभवी उद्घोषकों से कई सवाल पूछे और व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। उनकी उपस्थिति ने प्रशिक्षण को और अधिक जीवंत और प्रेरणादायी बना दिया।
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