काबुल
अमेरिकी सेना के अगस्त के अंत में अफगानिस्तान से जाने के बाद वहां आतंकवादी समूह अलकायदा के आतंकवादियों की संख्या थोड़ी बढ़ी है और देश के नए तालिबान नेता इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि समूह के साथ संबंध तोड़ने के संबंध में 2020 में किए गए संकल्प को पूरा किया जाए या नहीं। अमेरिका के एक शीर्ष कमांडर ने 9 दिसंबर को यह बात कही है।
अमेरिकी सेंट्रल कमान के प्रमुख मरीन जनरल फ्रैंक मैकेंजी ने कहा कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सैन्य और खुफिया एजेंसियों के चले जाने से अफगानिस्तान के अंदर अलकायदा और अन्य चरमपंथी समूहों पर नजर बनाए रखना बहुत मुश्किल हो गया है।
मैकेंजी ने अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन में कहा कि यह साफ है कि अलकायदा अफगानिस्तान के अंदर अपनी मौजूदगी को फिर से मजबूत बनाने का प्रयास कर रहा है, जहां से उसने 11 सितंबर, 2001 को अमेरिका के खिलाफ हमलों की साजिश रची थी। उन्होंने कहा कि कुछ आतंकवादी अफगानिस्तान की सीमा से देश में आ रहे हैं, लेकिन अमेरिका के लिए इनकी संख्या पर नजर रखना कठिन है।
अमेरिका में 11 सितंबर को हुए आतंकवादी हमलों के बाद अमेरिका ने करीब 20 साल तक अफगानिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई का नेतृत्व किया और तालिबान को सत्ता से हटाने में सफल रहा, लेकिन आखिरकार तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। अप्रैल में राष्ट्रपति जो बाइडन ने घोषणा की कि थी वह अफगानिस्तान से पूरी तरह से सेना को हटा रहे रहे हैं।
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