मुंबई
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शनिवार सुबह कारोबारी अनिल अंबानी के मुंबई स्थित आवास ‘सीविंड’, कफ परेड पर छापेमारी की. यह कार्रवाई 17,000 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले की जांच के तहत की गई है. सुबह लगभग 7 बजे CBI अधिकारी अंबानी के आवास पर पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक, 7–8 अधिकारी तलाशी अभियान में शामिल हैं. छापेमारी के दौरान अनिल अंबानी और उनका परिवार घर पर मौजूद रहा. CBI की यह छापेमारी रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें एजेंसी ने हाल ही में अपने दायरे का विस्तार किया है.
10 दिन का मांगा था समय
इससे पहले अनिल अंबानी ने जांच एजेंसियों को दस्तावेज जमा करने के लिए 10 दिन का समय मांगा था, लेकिन अधिकारियों को अब तक दी गई जानकारी से संतोष नहीं है. ईडी को संदेह है कि यस बैंक से मिले लोन में गड़बड़ी की गई और पैसे को शेल कंपनियों के जरिए दूसरी जगह भेजा गया. जानकारी के मुताबिक, ये शेल कंपनियां सिर्फ नाम मात्र के लिए थीं और उनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था. CBI की यह छापेमारी रिलायंस एडीए ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ चल रही विस्तृत जांच का हिस्सा है.
अरबों का बकाया कर्ज
ईडी के आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) पर ₹5,901 करोड़ से अधिक रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) पर ₹8,226 करोड़ से अधिक और आरकॉम (RCom) पर लगभग ₹4,105 करोड़ का कर्ज है. यह कर्ज करीब 20 सरकारी और निजी बैंकों के समूह का है, जिनमें यस बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं.
CBI ने दर्ज किए थे FIR
सीबीआई और ईडी दोनों अनिल अंबानी की कंपनियों से जुड़े कथित 17,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन फ्रॉड की जांच कर रहे हैं. CBI ने पहले दो FIR दर्ज कीं, जिसके बाद ईडी ने छापेमारी शुरू की. मामला वित्त वर्ष 2017 से 2019 के बीच का है, जब यस बैंक ने अनिल अंबानी की कंपनियों को अवैध तरीके से लोन ट्रांसफर किए. ईडी सूत्रों का कहना है कि लोन मिलने से ठीक पहले यस बैंक के प्रमोटर्स को उनके व्यवसाय में मोटा पैसा मिला, जिससे रिश्वत और दोनों पक्षों के बीच सांठगांठ की आशंका गहराती है. इसी लेन-देन और संदिग्ध फंडिंग कनेक्शन की जांच फिलहाल जारी है.
सूत्रों के मुताबिक, CBI ने दो एफआईआर दर्ज करने के बाद ईडी ने छापेमारी की थी. मामला वित्त वर्ष 2017 से 2019 का है, जब यस बैंक ने अनिल अंबानी की कंपनियों को अवैध तरीके से लोन ट्रांसफर किए. आरोप है कि लोन स्वीकृत होने से ठीक पहले यस बैंक के प्रमोटर्स को उनके कारोबार में मोटा पैसा मिला, जिससे रिश्वत और सांठगांठ की आशंका गहराती है. इससे पहले 4 अगस्त को ईडी ने अनिल अंबानी से पूछताछ की थी. पूछताछ के बाद ईडी ने उनके कई शीर्ष अधिकारियों को भी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत समन जारी किए. इनमें अंबानी के दो करीबी सहयोगी अमिताभ झुनझुनवाला और सतीश सेठ शामिल हैं, जो उनके व्यापारिक साम्राज्य में वरिष्ठ पदों पर रह चुके हैं और वित्तीय संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं. अधिकारियों के अनुसार, अब तक कम से कम छह समन जारी किए जा चुके हैं. इन अधिकारियों पर ईडी की नजर पहले से ही थी, जब विभिन्न परिसरों में तलाशी अभियान चलाया गया था.
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