बर्लिन
ग्लोबल वॉर्मिंग का असर भारत और चीन में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में दिखने लगा है। यूरोपीय संघ की जलवायु निगरानी सेवा द्वारा शुक्रवार को प्रकाशित किए गए आंकड़ों के अनुसार 27 देशों वाले संगठन के लिए 2020 सबसे गर्म वर्ष रहा। आंकड़ों में कहा गया है कि जबसे जलवायु संबंधी रिकॉर्ड रखने की शुरुआत हुई है, उसके बाद से पिछला साल यूरोपीय संघ के लिए सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया।
2020 में टूटा तापमान का रिकॉर्ड
यूरोपीय संघ की ‘कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस’ ने कहा कि यूरोप में पिछले साल के तापमान ने 0.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि के साथ 2019 के तापमान के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। विश्व में तापमान में वृद्धि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में वृद्धि की वजह से हो रही है जिनमें सबसे प्रमुख कार्बन डाई ऑक्साइड है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 पूर्व औद्योगिक काल 1850-1900 के तापमान के मुकाबले 1.25 सेंटिग्रेड अधिक गर्म रहा।
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